निपुण लक्ष्य
1. बालवाटिका – 3 (Balvatika 3: आयु 5–6 वर्ष)
बुनियादी साक्षरता (भाषा – मौखिक, पठन एवं लेखन)
मौखिक भाषा (Oral Language):
दोस्तों और शिक्षकों से अपनी ज़रूरतों, परिचित लोगों और आस-पास के वातावरण के बारे में बातचीत करते हैं और प्रश्न पूछते हैं।
समझ और हाव-भाव (Action) के साथ तुकबंदी/कविताएँ सुनाते हैं।
पठन (Reading):
चित्र पुस्तकों को देखते हैं और चित्रों के माध्यम से कहानी बनाने का प्रयास करते हैं।
परिवेश में मौजूद प्रिंट (खाद्य पदार्थों के रैपर, डिब्बे, लेबल आदि) में बार-बार आने वाले परिचित शब्दों या तुकबंदी वाले शब्दों (Sight words) को पहचानते हैं।
वर्णों/अक्षरों और उनसे जुड़ी ध्वनियों को पहचानते हैं।
कम से कम 2 से 3 अक्षरों से बने सरल शब्दों को पढ़ते हैं (अमात्रिक या सरल शब्द)।
लेखन (Writing):
आत्म-अभिव्यक्ति के लिए आड़ी-तिरछी रेखाएँ (Scribbling) खींचते हैं, चित्र बनाते हैं और रंग भरते हैं।
पेंसिल को सही ढंग से पकड़कर पहचानने योग्य अक्षर बनाते हैं।
अपने स्वयं के नाम (प्रथम नाम) को पहचानते हैं और लिखते हैं।
बुनियादी संख्या ज्ञान (गणित)
संख्या एवं गिनती: वस्तुओं को गिनते हैं और 9 तक की संख्याओं को मात्रा के साथ जोड़ते, पढ़ते और लिखते हैं।
तुलना एवं वर्गीकरण: वस्तुओं के दो समूहों की तुलना करके ‘कम’, ‘ज़्यादा’ या ‘बराबर’ बताते हैं। वस्तुओं को उनके गुणों (रंग, आकार आदि) के आधार पर छाँटते हैं और वर्गीकरण का आधार बताते हैं।
पैटर्न एवं क्रम: सरल पैटर्न को पहचानते हैं और उसकी नकल करते हैं। संख्याओं, वस्तुओं, आकृतियों और दैनिक घटनाओं को सही क्रम में लगाते हैं।
मापन शब्दावली: अपने आस-पास की वस्तुओं के संदर्भ में तुलनात्मक शब्दावली (लंबा/सबसे लंबा, छोटा/सबसे छोटा, ऊँचा/सबसे ऊँचा, भारी/हल्का) का प्रयोग करते हैं।
2. कक्षा – 1 (Class I: आयु 6–7 वर्ष)
बुनियादी साक्षरता (भाषा – मौखिक, पठन एवं लेखन)
मौखिक भाषा (Oral Language):
सहपाठियों और शिक्षकों से परिचित संदर्भों के बारे में बातचीत करते हैं और प्रश्न पूछते हैं।
कक्षा में उपलब्ध प्रिंट सामग्री (चार्ट, पोस्टर, कहानी कार्ड) के बारे में बात करते हैं।
हाव-भाव के साथ गीत/कविताएँ सुनाते हैं।
पठन (Reading):
कहानी सुनाने और सस्वर पठन (Read-aloud) सत्रों में सक्रिय भाग लेते हैं, कहानी के दौरान और बाद में प्रश्नों के उत्तर देते हैं तथा कठपुतली या अन्य सामग्री से परिचित कहानी का अभिनय करते हैं।
ध्वनि और प्रतीक (वर्ण/मात्रा) के संबंध का उपयोग करके नए/अपरिचित शब्दों को पढ़ने (Decode करने) का प्रयास करते हैं।
आयु के अनुकूल किसी अपरिचित पाठ से कम से कम 4 से 5 सरल शब्दों वाले छोटे वाक्य पढ़ते हैं।
लेखन (Writing):
परिचित कविताओं, कहानियों और कक्षा के प्रिंट में आने वाले शब्दों में मात्राओं से परिचित होते हैं।
अर्थ व्यक्त करने के लिए परिचित वस्तुओं/लोगों के चित्र बनाते हैं, शुभकामना संदेश बनाते हैं और कार्यपत्रक (Worksheet) पर अपना नाम लिखते हैं।
ध्वनि-प्रतीक संबंध का उपयोग करके स्व-वर्तनी (Invented spellings) के माध्यम से शब्द लिखते हैं।
समझ के साथ 2 से 3 सरल वाक्य लिखते हैं।
बुनियादी संख्या ज्ञान (गणित)
संख्या समझ एवं संक्रियाएँ: वस्तुओं को गिनते हैं और 20 तक की संख्याओं की समझ विकसित करते हैं। दैनिक जीवन में 9 तक की संख्याओं के जोड़ और घटाव (जिनका योग 20 से अधिक न हो) का प्रयोग करते हैं।
आकृतियाँ एवं पैटर्न: अपने आस-पास की ठोस आकृतियों (3D Shapes) के भौतिक गुणों (समतल/गोल सतह, किनारे, कोने) का अवलोकन और वर्णन करते हैं। प्रकृति, आकृतियों और संख्याओं में सरल पैटर्न को पहचानते हैं और आगे बढ़ाते हैं।
मापन एवं मुद्रा: अमानक इकाइयों (बालिश्त/बित्ता, कदम, उँगलियाँ) से लंबाई और (कप, चम्मच, मग) से धारिता (Capacity) का अनुमान लगाते हैं और जाँच करते हैं। ₹20 तक के भारतीय सिक्कों और नोटों को पहचानते हैं।
3. कक्षा – 2 (Class II: आयु 7–8 वर्ष)
बुनियादी साक्षरता (भाषा – मौखिक, पठन एवं लेखन)
मौखिक भाषा (Oral Language):
कक्षा में उपलब्ध प्रिंट सामग्री के बारे में बात करते हैं, बातचीत में प्रश्न पूछते हैं और दूसरों की बात ध्यान से सुनते हैं।
गीत/कविताएँ सुनाते हैं तथा कहानियों व परिवेशीय प्रिंट के परिचित शब्दों को दोहराते हैं।
पठन (Reading):
बाल साहित्य और पाठ्यपुस्तकों की कहानियों को पढ़ते हैं और अपने शब्दों में सुनाते (Retell) हैं।
दिए गए शब्द के अक्षरों से सार्थक नए शब्द बनाते हैं।
आयु के अनुकूल किसी अपरिचित पाठ से सरल शब्दों वाले 6 से 8 वाक्यों को समझ, स्पष्टता और प्रवाह (Fluency) के साथ पढ़ते हैं।
लेखन (Writing):
अपने विचारों और समझ को व्यक्त करने के लिए छोटे और सरल वाक्य लिखते हैं।
पठनीय (सुंदर व स्पष्ट) हस्तलेखन में 4 से 5 छोटे वाक्य लिखते हैं।
बुनियादी संख्या ज्ञान (गणित)
संख्या समझ एवं संक्रियाएँ: वस्तुओं को गिनते हैं और 99 तक की संख्याओं की समझ विकसित करते हैं। दैनिक जीवन की स्थितियों में 99 तक की संख्याओं के जोड़ और घटाव (योग 99 से अधिक न हो) का उपयोग करते हैं।
गुणा एवं भाग: गुणा को बार-बार जोड़ने (Repeated addition) और भाग को बराबर बाँटने (Equal distribution) के रूप में करते हैं; 2, 3 और 4 के पहाड़े (Multiplication tables) बनाते हैं।
आकृतियाँ, पैटर्न एवं स्थानिक समझ: द्वि-आयामी (2D) आकृतियों (आयत, त्रिभुज, वृत्त, अंडाकार) को पहचानते हैं और वर्णन करते हैं। स्थानिक शब्दावली (दूर/पास, अंदर/बाहर, ऊपर/नीचे, बाएँ/दाएँ, आगे/पीछे) का सही प्रयोग करते हैं।
मापन एवं मुद्रा: समान अमानक इकाइयों (छड़, पेंसिल, धागा, कप, मग) से लंबाई, दूरी और धारिता मापते हैं तथा साधारण तराजू से भार की तुलना करते हैं। ₹100 तक के धन का उपयोग करके सरल लेन-देन करते हैं।
4. कक्षा – 3 (Class III: आयु 8–9 वर्ष)
बुनियादी साक्षरता (भाषा – मौखिक, पठन एवं लेखन)
मौखिक भाषा (Oral Language):
घर या स्कूल की भाषा में उपयुक्त शब्दावली का प्रयोग करते हुए स्पष्टता से बातचीत करते हैं।
कक्षा में उपलब्ध प्रिंट सामग्री पर चर्चा करते हैं, अपने अनुभव सुनाते हैं, प्रश्न पूछते हैं और दूसरों की बातों पर प्रतिक्रिया देते हैं।
उचित हाव-भाव, उतार-चढ़ाव (Modulation) और लय के साथ व्यक्तिगत और समूह में कविताएँ सुनाते हैं।
पठन (Reading):
परिचित पुस्तकों/पाठ्यपुस्तकों से आवश्यक जानकारी ढूँढते हैं और लिखित निर्देशों का पालन करते हैं।
आयु के अनुकूल किसी अपरिचित पाठ को सही उच्चारण और समझ के साथ कम से कम 60 शब्द प्रति मिनट की गति से पढ़ते हैं।
8 से 10 वाक्यों की किसी अपरिचित कहानी या अनुच्छेद को पढ़कर कम से कम 4 में से 3 प्रश्नों के सही उत्तर देते हैं।
लेखन (Writing):
विभिन्न उद्देश्यों के लिए छोटे संदेश लिखते हैं।
लेखन में संज्ञा शब्दों (Naming words), क्रिया शब्दों (Action words) और विराम चिह्नों (पूर्ण विराम, प्रश्नवाचक चिह्न आदि) का सही प्रयोग करते हैं।
व्याकरणिक रूप से सही वाक्यों का प्रयोग करते हुए छोटे अनुच्छेद और छोटी कहानियाँ लिखते हैं।
बुनियादी संख्या ज्ञान (गणित)
संख्या समझ एवं संक्रियाएँ: 9,999 तक की संख्याओं को पढ़ते और लिखते हैं। दैनिक जीवन की समस्याओं को हल करने के लिए 999 तक की संख्याओं के जोड़ और घटाव (योग 999 से अधिक न हो) का उपयोग करते हैं। 2 से 10 तक के पहाड़े बनाते व उपयोग करते हैं तथा भाग के तथ्यों का प्रयोग करते हैं।
आकृतियाँ एवं मापन: 2D आकृतियों को 3D वस्तुओं से जोड़ते हैं और उनके गुणों (सतह/फलक, किनारे, कोने) का वर्णन करते हैं। मानक इकाइयों (मीटर, किलोमीटर, ग्राम, किलोग्राम, लीटर) का उपयोग करके लंबाई, दूरी, भार और धारिता का अनुमान लगाते हैं और मापते हैं।
समय, भिन्न एवं पैटर्न: कैलेंडर पर तारीख और दिन पहचानते हैं; घड़ी में घंटे और आधे घंटे में समय पढ़ते हैं। किसी पूर्ण वस्तु और वस्तुओं के समूह में भिन्न (आधा, एक-चौथाई, तीन-चौथाई) की पहचान करते हैं। संख्याओं, आकृतियों और घटनाओं के पैटर्न को आगे बढ़ाते हैं और उसका नियम बताते हैं।